Friday, October 5, 2007

जिस प्रकार न्‍यूज चैनलों के पास पत्रकारों का टोटा हो गया है उसमें सिटीजन पत्रकार ही कार्य करेगें ऐसे में यह देखना होगा कि सिटीजन पत्रकार अपने आप किस रूप में स्‍थापित कर पाते है दूसरे यह कि चैनल्‍स को पूरे देश में पत्रकारो की एक लम्‍बी फौज नही खडी करनी पड रही है । इस समय चैनल आम के आम गठलियों के भी दाम वाली कहावत पर काम कर रहे है ।

Wednesday, October 3, 2007

क्‍या दिखाना चाहते है आज न्यूज चैनल

गत दिनों एक नौसिखियें न्यूज चैनल ने ऐसा स्टिंग आपरेशन किया कि बेचारे का खुद ही आपरेशन हो गया । आज जरूरत इस बात की सोचने की है कि क्‍या हम जो जनता के सामने रख रहे है वह सब ठीक है अथवा उसमें भी कुछ सोचने समझने व जानने की जरूरत है । क्‍या सेन्ट्रल टैबल पर बैठे हुये महानुभावों की जिम्‍मेदारी कुछ नही है,सब कुछ स्‍थानीय संवाददाताओं के विश्‍वास पर छोड दिया है अब वही जो फीड देगें वही दिखाना हमारी मजबूरी बन गयी है । उसकी सत्यता जानने की भी कोई कोशिश मुख्‍यालय द्वारा नही की गयी किसी भी सम्‍बन्धित पक्ष से भी कोई असलियत जानने की कोशिश की गयी । अगर नही तो यह फल भुगतना ही था,खैर इस घटना ने अन्‍य चैनलों के लिये एक रोड मैप जरूर बना दिया है कि हम स्‍टूडियों में बैठकर किसी भी ख़बर को पूरी तरह से सच नही मान सकते पहले हमें ख़बर की तह तक जायेगा उसके उपरान्‍त ही ख़बर को आन ऐयर करे । सफ़र अभी बहुत लम्‍बा है अभी हमें सभंल जाना चाहियें तभी हम अपनी बिरादरी को कंलकिंत होने से बचा सकते है तथा आपसी गलाकाट प्रतियोगिता से अपने को बचा कर जनता के सामने वही रखें जो सच है । सच को रखने में हम किसी भी प्रकार का गुरेज नही होना चाहियें सत्य चाहे व्हाइट हाउस का हो दस जनपथ का अथवा गली के पिछवाडे रहने वाले कल्लू का लेकिन उसमें सत्यता का तड़का जरूर होना चाहिये तभी हम अपनी कमीज़ को साफ़ रख सकेंगें । शायद हमने कुछ ज्यादा ही लिख दिया है । इस पर अपनी बिरादरी का विशलेषण जरूर चाहूगां ।
आपका

Saturday, August 25, 2007

हमारी भी सुनो

चक्रधर जी आपकों शशिकान्‍त अवस्थी का नमस्‍कार